Muskaan

दूसरों की फ़िक्र में इतना भी सदा ना मुसकुराओ

की  वो मुस्कान तुम्हारे ग़मों का पर्दा बन जाए

जब सच में आँख नम हो

तो कहीं दुनिया उसे ख़ुशी के अश्रू समझ जाए ॥



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